लखनऊ। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर एक पेड़ माँ के नाम अभियान के तहत वृक्षारोपण एवं विचार गोष्ठी का आयोजन परम्परा ट्रस्ट द्वारा इंटौजा स्थित ट्रस्ट के शिक्षण संस्थान में किया गया। वृक्षा रोपण के बाद संस्था प्रमुख पंकज कुमार और डॉ. सलमान (पी.एच.डी जियोग्राफी ) ने बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस की शुरुआत वर्ष 1972 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा आयोजित स्टॉकहोम सम्मेलन के बाद की गई थी। इसके बाद वर्ष 1973 से प्रत्येक वर्ष 5 जून को यह दिवस मनाया जाने लगा। इसका उद्देश्य लोगों को पर्यावरणीय समस्याओं के प्रति जागरूक करना और उन्हें संरक्षण के लिए प्रेरित करना है। आज यह दिवस दुनिया के 150 से अधिक देशों में विभिन्न कार्यक्रमों, जनजागरूकता अभियानों, वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियानों, संगोष्ठियों और रैलियों के माध्यम से मनाया जाता है। उन्होंने कहा जहां सरकार एक तरफ पर्यावरण संरक्षण के लिए दृढ़ संकल्पित है वहीं समाज के हर व्यक्ति को इसके लिए जागरूक रहने की आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि प्रत्येक वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। यह दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि मानव जाति को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का स्मरण कराने का एक वैश्विक अभियान है। बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई, जैव विविधता के क्षरण और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन ने पर्यावरणीय संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। ऐसे समय में विश्व पर्यावरण दिवस हमें यह संदेश देता है कि यदि पृथ्वी को बचाना है तो प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करना होगा और पर्यावरण संरक्षण को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा।
संस्था की निदेशक पूजा यादव ने बताया कि जिस तरह रोटी कपड़ा और मकान इंसान की बुनियादी जरूरत है उसी तरह स्वच्छ पर्यावरण भी इंसान की बुनियादी जरूरत है। जीवित रहने के लिए साफ पानी, साफ हवा, और स्वच्छ परिवेश बुनियादी आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति का नैतिक दायित्व है। हम अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव करके बड़ा योगदान दे सकते हैं। जल और बिजली की बचत करना, प्लास्टिक का कम उपयोग करना, अधिक से अधिक वृक्ष लगाना, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना, कचरे का पृथक्करण करना तथा स्वच्छता बनाए रखना ऐसे सरल उपाय हैं जो पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। बच्चों और युवाओं में पर्यावरण के प्रति जागरूकता विकसित करना भी अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि आने वाला भविष्य उन्हीं के हाथों में है। इस अवसर पर विचार व्यक्त करने वालो में श्रीमान शशांक श्रीवास्तव, सौरभ सिंह, राहुल वर्मा आदि प्रमुख हैं।
संस्था की निदेशक पूजा यादव ने बताया कि जिस तरह रोटी कपड़ा और मकान इंसान की बुनियादी जरूरत है उसी तरह स्वच्छ पर्यावरण भी इंसान की बुनियादी जरूरत है। जीवित रहने के लिए साफ पानी, साफ हवा, और स्वच्छ परिवेश बुनियादी आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति का नैतिक दायित्व है। हम अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव करके बड़ा योगदान दे सकते हैं। जल और बिजली की बचत करना, प्लास्टिक का कम उपयोग करना, अधिक से अधिक वृक्ष लगाना, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना, कचरे का पृथक्करण करना तथा स्वच्छता बनाए रखना ऐसे सरल उपाय हैं जो पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। बच्चों और युवाओं में पर्यावरण के प्रति जागरूकता विकसित करना भी अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि आने वाला भविष्य उन्हीं के हाथों में है। इस अवसर पर विचार व्यक्त करने वालो में श्रीमान शशांक श्रीवास्तव, सौरभ सिंह, राहुल वर्मा आदि प्रमुख हैं।
Tags
Lucknow
