वॉशिंगटन/ तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव के बीच फारस की खाड़ी का रणनीतिक खार्ग द्वीप एक बार फिर वैश्विक तनाव का केंद्र बन गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के इस महत्वपूर्ण द्वीप पर बड़ा बमबारी अभियान चलाकर कई सैन्य ठिकानों को नष्ट कर दिया है। वहीं ईरान ने इस हमले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है। शनिवार को ईरान ने इराक की राजधानी बगदाद स्थित अमेरिकी दूतावास पर भी मिसाइल हमला किया। मिसाइल दूतावास परिसर के भीतर बने हेलीपैड के पास गिरी जिससे इमारत क्षतिग्रस्त हो गई और अमेरिकी वायुरक्षा प्रणाली को भी नुकसान होने की खबर है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि अमेरिकी केंद्रीय कमान ने खार्ग द्वीप पर मध्य-पूर्व के इतिहास के सबसे शक्तिशाली बमबारी अभियानों में से एक को अंजाम दिया। उनके अनुसार इस कार्रवाई में द्वीप पर मौजूद सभी प्रमुख सैन्य लक्ष्यों को निशाना बनाकर नष्ट कर दिया गया, जबकि जानबूझकर तेल से जुड़े बुनियादी ढांचे को नुकसान नहीं पहुंचाया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान या कोई अन्य पक्ष होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षित आवाजाही में बाधा डालता है तो अमेरिका अपने फैसले पर पुनर्विचार करते हुए तेल अवसंरचना को भी निशाना बना सकता है। फारस की खाड़ी में ईरान के तट से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित खार्ग द्वीप ईरान के लिए अत्यंत रणनीतिक महत्व रखता है। देश के लगभग 90 प्रतिशत कच्चे तेल का निर्यात इसी द्वीप से संचालित होता है और इसे ईरान की ऊर्जा व्यवस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि द्वीप पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करने के लिए बड़े पैमाने पर जमीनी सैनिकों की आवश्यकता होगी, जिसे लेकर अमेरिकी प्रशासन फिलहाल अनिच्छुक नजर आ रहा है।
अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियानों में 50 हजार से अधिक अमेरिकी सैनिक शामिल हैं। अमेरिकी केंद्रीय कमान के मुताबिक अब तक लगभग छह हजार लक्ष्यों पर हमले किए जा चुके हैं और 60 से अधिक जहाजों तथा 30 बारूदी सुरंग बिछाने वाले पोतों को नुकसान पहुंचाया गया या नष्ट कर दिया गया है। अमेरिका ने अपनी सैन्य मौजूदगी और मजबूत करने के लिए युद्धपोत यूएसएस ट्रिपोली और लगभग 2500 मरीन सैनिकों को भी पश्चिम एशिया भेजने का फैसला किया है। इसके साथ ही अतिरिक्त युद्धपोतों और एफ-35 लड़ाकू विमानों की तैनाती की तैयारी भी की जा रही है।
अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियानों में 50 हजार से अधिक अमेरिकी सैनिक शामिल हैं। अमेरिकी केंद्रीय कमान के मुताबिक अब तक लगभग छह हजार लक्ष्यों पर हमले किए जा चुके हैं और 60 से अधिक जहाजों तथा 30 बारूदी सुरंग बिछाने वाले पोतों को नुकसान पहुंचाया गया या नष्ट कर दिया गया है। अमेरिका ने अपनी सैन्य मौजूदगी और मजबूत करने के लिए युद्धपोत यूएसएस ट्रिपोली और लगभग 2500 मरीन सैनिकों को भी पश्चिम एशिया भेजने का फैसला किया है। इसके साथ ही अतिरिक्त युद्धपोतों और एफ-35 लड़ाकू विमानों की तैनाती की तैयारी भी की जा रही है।
हालांकि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिकी हमलों में द्वीप के लगभग 15 स्थानों को निशाना बनाया गया, जिनमें हवाई रक्षा ठिकाने, जोशन नौसैनिक अड्डा, हवाई अड्डे का वॉचटावर और हेलीकॉप्टर पैड शामिल थे, लेकिन द्वीप की रक्षा प्रणाली एक घंटे के भीतर फिर से सक्रिय हो गई। आईआरजीसी ने यह भी दावा किया कि तेल से जुड़ा कोई भी बुनियादी ढांचा इन हमलों में क्षतिग्रस्त नहीं हुआ। इस बीच ईरान ने स्पष्ट किया है कि यदि उसके ऊर्जा, तेल या आर्थिक ढांचे को नुकसान पहुंचाया गया तो वह क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी और सहयोगी देशों के तेल तथा गैस बुनियादी ढांचे को निशाना बना सकता है।
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