स्पीकर बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव खारिज

  • शाह का राहुल गांधी पर तंज: 'आंख मारने वाले भी सवाल उठा रहे'
  • संसद में महंगाई, एलपीजी और टेलीकॉम मुद्दों पर सरकार घिरी

नई दिल्ली। संसद के मौजूदा सत्र के दौरान बुधवार को लोकसभा में महंगाई, एलपीजी गैस की उपलब्धता, हवाई किराए में बढ़ोतरी और टेलीकॉम कंपनियों की नीतियों को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश की, वहीं सरकार ने डिजिटल इंडिया और इंटरनेट विस्तार की उपलब्धियों को सामने रखा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि यह कोई सामान्य घटना नहीं है। करीब चार दशक बाद लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है, जो संसदीय राजनीति और सदन दोनों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि लोकसभा के इतिहास के अनुसार सदन की कार्यवाही आपसी विश्वास के आधार पर चलती है। अध्यक्ष एक निष्पक्ष संरक्षक के रूप में कार्य करते हैं, जो सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसी उद्देश्य से सदन ने नियम बनाए हैं, जिनके आधार पर अध्यक्ष सदन की कार्यवाही का संचालन करते हैं।

अमित शाह ने कहा कि यह सदन कोई बाजार नहीं है, बल्कि यहां सदस्यों से अपेक्षा की जाती है कि वे निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार अपनी बात रखें और चर्चा में भाग लें। उन्होंने कहा कि कोई भी सदस्य अपने अधिकारों की बात कर सकता है, लेकिन सदन के नियमों का उल्लंघन नहीं किया जा सकता।
प्रश्नकाल के दौरान केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि देश में किफायती दरों पर इंटरनेट उपलब्ध कराया जा रहा है और पिछले दस वर्षों में इसकी पहुंच में तेजी से वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में जहां लगभग 25 करोड़ लोग इंटरनेट का उपयोग करते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 103 करोड़ तक पहुंच गई है। 

उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया अभियान के तहत सरकार ने तीन प्रमुख क्षेत्रों पर काम किया है-इंटरनेट की पहुंच बढ़ाना, इसकी कीमतें कम करना और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना। मंत्री ने दावा किया कि भारत में इंटरनेट की दरें वैश्विक औसत की तुलना में लगभग 25 गुना कम हैं, जिससे डिजिटल सेवाएं आम लोगों के लिए सुलभ हुई हैं। इसी दौरान रेल मंत्रालय से जुड़े पूरक प्रश्न के उत्तर में वैष्णव ने बताया कि मुंबई में रेल आधारभूत संरचना को मजबूत करने के लिए कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है और रेल सुरक्षा के लिए ‘कवच’ परियोजना को तेजी से लागू किया जा रहा है।

सत्र के दौरान विपक्ष ने कई जनसरोकार से जुड़े मुद्दों को उठाया। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले दस वर्षों में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार वृद्धि हुई है, जिससे आम लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ा है। उन्होंने एलपीजी गैस की कीमतों और उपलब्धता को भी सरकार की नीतियों का परिणाम बताते हुए कहा कि इस विषय पर सदन में गंभीर चर्चा होनी चाहिए। कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति को लेकर चिंता जताई और कहा कि कई स्थानों पर गैस एजेंसियों को व्यावसायिक उपयोग के लिए सिलेंडर की आपूर्ति सीमित करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे छोटे कारोबार प्रभावित हो रहे हैं। कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने हवाई किराए में तेजी से हो रही बढ़ोतरी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आम लोगों के लिए हवाई यात्रा लगातार महंगी होती जा रही है।

इसी क्रम में कांग्रेस सांसद जोतिमणि ने कहा कि कमर्शियल गैस सिलेंडरों की कमी का असर छोटे दुकानदारों और चाय की दुकानों तक पर पड़ रहा है, जिससे हजारों लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। उन्होंने सरकार से इस पर स्पष्ट स्थिति बताने की मांग की। टेलीकॉम सेवाओं से जुड़ा मुद्दा भी संसद में उठा। आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने प्रीपेड मोबाइल रिचार्ज की वैधता समाप्त होने के बाद इनकमिंग कॉल बंद किए जाने को उपभोक्ताओं के साथ अन्याय बताया। उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन आज आम लोगों की जरूरत बन चुका है, इसलिए कम से कम एक वर्ष तक इनकमिंग कॉल जारी रहने की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि लोगों का संचार का अधिकार प्रभावित न हो।

इस बीच कांग्रेस ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि सरकार संसदीय परंपराओं का पालन नहीं कर रही है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि पूर्व में ऐसे प्रस्तावों पर हुई बहस के दौरान प्रधानमंत्री सदन में उपस्थित रहते थे और विपक्ष को पर्याप्त समय दिया जाता था। सत्र के दौरान इन मुद्दों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।

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