रामगोपाल राणा की मौत पर आवाज उठाई तो मिला तबादले का फरमान

लखीमपुर खीरी में टीजी-2 कर्मी की मौत के बाद प्रदर्शन करने वाले बिजली कर्मचारियों पर गिरी गाज

लखीमपुर खीरी। गढ़ी पावर हाउस पर तैनात टीजी-2 कर्मचारी रामगोपाल राणा की हार्ट अटैक से हुई मौत के बाद बिजली विभाग में उभरा आक्रोश अब नए विवाद का रूप ले चुका है। मृतक के सहकर्मियों द्वारा न्याय की मांग को लेकर किए गए प्रदर्शन के बाद मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड ने कड़ी कार्रवाई करते हुए दर्जनों कर्मचारियों का तत्काल प्रभाव से स्थानांतरण कर दिया है।कर्मचारियों का आरोप है कि अधीक्षण अभियंता ब्रह्मपाल की कथित मानसिक प्रताड़ना के चलते रामगोपाल राणा की तबीयत बिगड़ी। इसी आरोप को लेकर बिजली कर्मियों ने सदर कोतवाली का घेराव किया और नई बस्ती पावर हाउस पर धरना देकर कार्रवाई की मांग की थी।मृतक के बहनोई महादेव के अनुसार, शुक्रवार देर रात बंद कमरे में हुई बैठक में रामगोपाल राणा को कड़ी फटकार लगाई गई। वे रात भर सो नहीं सके। शनिवार तड़के अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई। घटना के बाद कर्मचारियों में भारी आक्रोश देखा गया। उन्होंने अधीक्षण अभियंता की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। आरोप है कि इस विरोध से नाराज़ प्रबंधन ने संवेदनशीलता दिखाने के बजाय सख्त प्रशासनिक कदम उठाए।

जबरन स्थानांतरण का आरोप: मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड द्वारा 27 जनवरी 2026 को जारी कार्यालय आदेशों के तहत लखीमपुर खीरी में तैनात कई टीजी-2 कर्मियों और कार्यालय सहायकों का तत्काल प्रभाव से स्थानांतरण कर दिया गया। आदेश में कर्मचारियों को वर्तमान तैनाती से कार्यमुक्त कर अन्य इकाइयों में जॉइन करने के निर्देश दिए गए हैं।कर्मचारियों का कहना है कि यह स्थानांतरण किसी प्रशासनिक आवश्यकता के तहत नहीं, बल्कि प्रदर्शन में शामिल होने की सजा के तौर पर किया गया है। कई कर्मचारियों को बरेली, रायबरेली, अयोध्या, सीतापुर सहित अन्य दूरस्थ जनपदों में भेजा गया है। साथ ही ईआरपी पर कार्यमुक्त करने के निर्देश भी तत्काल लागू किए गए हैं।

बिजली कर्मियों का कहना है कि वे अपने साथी की मौत के लिए न्याय की मांग कर रहे थे, लेकिन प्रबंधन ने उनकी बात सुनने के बजाय दमनात्मक कार्रवाई की। कर्मचारियों में इस कार्रवाई को लेकर भारी असंतोष है।मामले में विभागीय उच्चाधिकारियों की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कर्मचारी निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और स्थानांतरण आदेश वापस लेने की मांग पर अड़े हैं।रामगोपाल राणा की मौत और इसके बाद हुए स्थानांतरण ने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रबंधन इस पूरे मामले में क्या रुख अपनाता है।

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