मुख्यमंत्री ने कलाकारों की प्रस्तुतियों को सराहा, उत्तर प्रदेश भ्रमण का दिया आमंत्रण
कलाकारों ने भी मुख्यमंत्री से मिलकर व्यक्त की प्रसन्नता, सम्मान मिलने पर जताया आभार
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को अपने सरकारी आवास पर उन कलाकारों का सम्मान किया, जिन्होंने 77वें गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर विभिन राज्यों की कला-संस्कृति से जुड़ी प्रस्तुतियां दीं। मुख्यमंत्री ने इन कलाकारों का सम्मान करते हुए कहा कि "एक भारत-श्रेष्ठ भारत" की भावना के अंतर्गत गणतंत्र दिवस-2026 के अवसर पर विभिन्न राज्यों से आए अतिथि कलाकार अपने-अपने प्रदेशों की लोक संस्कृति और लोक नृत्यों की सांस्कृतिक सुगंध लेकर उत्तर प्रदेश पहुंचे। उत्तर प्रदेश के कलाकारों ने भी अपनी समृद्ध सांस्कृतिक परम्पराओं के माध्यम से “विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश” विषयक सांस्कृतिक प्रस्तुति को भव्य एवं वैभवपूर्ण स्वरूप प्रदान किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कलाकारों से संवाद किया, उनकी प्रस्तुतियों की सराहना की और उन्हें उत्तर प्रदेश भ्रमण का आमंत्रण भी दिया। कलाकारों ने मुख्यमंत्री से मिलकर प्रसन्नता व्यक्त की, उनका आभार जताया और उनके सुशासन की प्रशंसा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सर्वाधिक आबादी वाला राज्य होने के साथ-साथ आध्यात्मिक, धार्मिक व सांस्कृतिक विरासत की भूमि है। तमिलनाडु से लेकर जम्मू-कश्मीर, अरुणाचल से गुजरात, महाराष्ट्र व सिक्किम तक के लोग यहां आते हैं। भिन्न-भिन्न भाषाएं, कलाएं व परम्पराएं होते हुए भी सभी का भाव एक है, जो "एक भारत-श्रेष्ठ भारत" की अवधारणा को सशक्त बनाता है। मुख्यमंत्री ने त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश व सिक्किम का उल्लेख करते हुए कहा कि ये राज्य अब विकास की मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं। त्रिपुरा से आए 28 कलाकारों की गणतंत्र दिवस परेड में सहभागिता देश की सांस्कृतिक एकता का जीवंत उदाहरण है। इतनी दूरी से आकर कार्यक्रम में शामिल होना अत्यंत सराहनीय है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश का पहला कला एवं संस्कृति को समर्पित विश्वविद्यालय है। राष्ट्रीय पर्वों, दीपोत्सव, उत्तर प्रदेश दिवस और अन्य महत्वपूर्ण आयोजनों में विभिन्न राज्यों के कलाकारों के साथ संयुक्त प्रस्तुतियां तैयार करना विश्वविद्यालय का दायित्व होना चाहिए। पूर्वांचल का बिरहा, अवध की रामकथा, ब्रज की कृष्णलीला, बुंदेलखंड का आल्हा और अन्य क्षेत्रों की लोक कलाओं को मिलाकर लघु लेकिन प्रभावशाली प्रस्तुतियां तैयार की जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने मथुरा के कलाकारों से अपनी सांस्कृतिक परम्पराओं को जीवंत बनाए रखने का आह्वान किया। प्रयागराज के कलाकारों से उन्होंने कहा कि माघ मेला अब कुंभ के समान विराट रूप ले चुका है, जहां लोक कलाओं की व्यापक प्रस्तुति होनी चाहिए। अयोध्या के कलाकारों से उन्होंने कहा कि दीपोत्सव में नियमित रूप से प्रस्तुति देकर अयोध्या की कला को राष्ट्रीय पहचान दिलाएं और अन्य राज्यों के कलाकारों के साथ संयुक्त मंचन करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोककला और संस्कृति भारत की आत्मा हैं। विभिन्न राज्यों की संयुक्त प्रस्तुतियां देश की सांस्कृतिक एकता, विविधता व समरसता को सशक्त करती हैं तथा "एक भारत-श्रेष्ठ भारत" की अवधारणा को साकार करती हैं।
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